50+ श्री कृष्ण और श्रीमद भागवत गीता के अनमोल वचन हिंदी में

 


जो कोई भी जिस किसी भी देवता की पूजा विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता है , मैं उसका विश्वास उसी देवता में दृढ कर देता हूँ .


हे अर्जुन !, मैं भूत , वर्तमान और भविष्य के सभी प्राणियों को जानता हूँ , किन्तु वास्तविकता में कोई मुझे नहीं जानता .



  स्वर्ग प्राप्त करने और वहां कई वर्षों तक वास करने के पश्चात एक असफल योगी का पुन: एक पवित्र और समृद्ध कुटुंब में जन्म होता है .



  केवल मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है .



  मैं सभी प्राणियों के ह्रदय में विद्यमान हूँ .



  ऐसा कुछ भी नहीं , चेतन या अचेतन , जो मेरे बिना अस्तित्व में रह सकता हो . 




  वह जो मृत्यु के समय मुझे स्मरण करते हुए अपना शरीर त्यागता है, वह मेरे धाम को प्राप्त होता है . इसमें कोई शंशय नहीं है 



  वह जो इस ज्ञान में विश्वास नहीं रखते , मुझे प्राप्त किये बिना जन्म और मृत्यु के चक्र का अनुगमन करते हैं





कर्म न करने से, कर्म करना श्रेष्ठ हैं.


आसक्ति से कामना का जन्म होता हैं.




नैराश्यं परमं सुखम् (निराश परम सुख है.)





क्रोध से मुर्खता उत्पन्न होती हैं, मूढ़ता से भ्रान्ति, भ्रान्ति से बुध्दि का नाश, और बुध्दि के नाश से प्राणी का नाश होता हैं.






असत का अस्तित्व नहीं है और सत का नाश नहीं है, नित्य रहने वाले देह की यह देह नाशवान कही गई है.






कार्य में कुशलता का योग कहते है.





सर्वत्र समभाव रखने वाला योगी अपने को सब भूतों में, और सब भूतों को अपने में देखता है.






ईश्वर सब प्राणियों के ह्रदय में वास करता है, और अपनी माया के बल से उन्हें चाक पर चढ़े हुये घड़े की भांति घुमाता है.







जो अपने हिस्से का काम किये बिना ही भोजन पाते है, वे चोर है.




परमात्मा को प्राप्ति के इच्छुक ब्रम्हचर्य का पालन करते है.






मन बड़ा चंचल है, मनुष्य को मथ डालता है, अतः बहुत बलवान है.




अपकीर्ति मृत्यु से भी बुरी है.




फल की अभिलाषा छोड़ कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है.






जो हमेशा शंका मन में रखते हैं उन्हें ना इस संसार में और ना ही कहीं भी चैन मिलता हैं |.







बुद्धिमान व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक ही देखता हैं यही सत्य हैं |.






हमेशा कर्म करो क्यूंकि बेकार रहने से कई ज्यादा कर्मवान होना हैं |.





क्रोध से माया उत्पन्न होती हैं, माया से बुद्धि व्यग्र होती हैं और व्यग्र बुद्धि से विचारों का नाश होता हैं | और एक बार जब विचारों का नाश होता हैं उस वक्त सब खत्म हो जाता हैं |.







अपने ज्ञान से अपने भीतर के अज्ञान को तलवार से काटकर उसका वध करों | अपने अनुशासन में रहो , जागो |.





जो अपनी सोच को नियंत्रित नहीं रख पाते, उनकी सोच उन्ही की दुश्मन बन जाती हैं |.





मनुष्य अपने विचारों से बनता हैं जैसा वो सोचता हैं वही वो होता हैं |.






भगवान की शक्ति आपके पास हमेशा मानसिक कार्यों, अहसास, श्वास के रूप में हैं | जिसका उपयोग आप हमेशा करते हैं |.


लालच, गुस्सा और वासना तीनो नरक के द्वार हैं |.





मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो मुझमे समाय हुए हैं और मुझे प्रेम करते हैं |.






भगवान सभी जगह में हैं सभी के उपर हैं .






सभी अच्छे कार्यों को एक तरह रखकर भगवान की भक्ति में लीन हो जायेंगे तब मैं आपको सभी पापो से मुक्त कर दूंगा |आपको इसकी चिंता की जरूरत नहीं |.





जो खुद पर विश्वास करते हैं वो किसी भी चीज के लिए भगवान के अलावा किसी पर आश्रित नहीं होते |.






मेरी दृष्टि सभी प्राणियों पर समान रूप से रहती हैं ना किसी पर ज्यादा ना कम | लेकिन जो मुझसे प्रेम करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और में उनके जीवन में |.







हे अर्जुन ! केवल कुछ ही भाग्यशाली योद्धा होते हैं जिन्हें ऐसे धर्म के लिए लड़ने का मौका मिलता हैं जो सीधे स्वर्ग का द्वार खोलते हैं |.






आपके विशाल स्वरूप में ना शुरुवात न मध्य ना अंत देखा जा सकता हैं |.






मेरी कृपा से जो मुझमे लीं होता हैं उसे तब आत्मीय संतोष मिलता हैं भले ही उसने अपने सारे कर्म किये हो |.






किसी और का काम श्रद्धा से करने से कई गुना अच्छा हैं कि अपना कार्य पूरी लग्न के साथ करें |.







एक बुद्धिमान व्यक्ति को जीवन का सुख कामुकता से नहीं मिलता |.










भगवान की शक्ति आपके पास हमेशा मानसिक कार्यों, अहसास, श्वास के रूप में हैं | जिसका उपयोग आप हमेशा करते हैं |.





























































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